आसपास का दौरा स्थान

 

 

सांची में बौद्धस्मारक

सांची भारत के मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन जिले, में बेतवा नदी के तट स्थित एक छोटा सा गांव है। यह भोपाल से ४६ कि॰मी॰ पूर्वोत्तर में, तथा बेसनगरऔर विदिशा से १० कि॰मी॰ की दूरी पर मध्य-प्रदेश के मध्य भाग में स्थित है। यहां कई बौद्ध स्मारक हैं, जो तीसरी शताब्दी ई.पू से बारहवीं शताब्दी के बीच के काल के हैं। 

 

 

भीमबेटका शैलाश्रय

 भीमबेटका (भीमबैठका) भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त के रायसेन जिले में स्थित एक पुरापाषाणिक आवासीय पुरास्थल है। यह आदि-मानव द्वारा बनाये गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है। इन चित्रों को पुरापाषाण काल से मध्यपाषाण काल के समय का माना जाता है। ये चित्र भारतीय उपमहाद्वीप में मानव जीवन के प्राचीनतम चिह्न हैं।यह स्थल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से ४५ किमी दक्षिणपूर्व में स्थित है। इनकी खोज वर्ष १९५७-१९५८ में डाक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकरद्वारा की गई थी।

 

 

इंदिरागांधीराष्ट्रीय मानवसंग्रहालय-मानव जातिके राष्ट्रीय संग्रहालय

इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में स्थित है और 200 एकड़ के क्षेत्र में श्‍यामला पहाडि़यों पर बना हुआ है। यहां से बड़ा तालाब का मनोरम दृश्‍य दिखाई देता है। इस संग्रहालय को देश का सबसे बड़ा खुला हवा मानवविज्ञानसंग्रहालय होने का दावा किया जाता है। इस संग्रहालय को 1977 में खोला गया था ताकि लोग मानव जाति के इतिहास के बारे में जान सकें और मानव विज्ञान के बारे में शिक्षित हो सकें।

 

 

बड़े तालाब

बड़ा तालाब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मध्य में स्थित मानव निर्मित एक झील है। इस तालाब का निर्माण 11वीं सदी में किया गया था। भोपाल में एक कहावत है- "तालों में ताल भोपाल का ताल बाकी सब तलैया", अर्थात् "यदि सही अर्थों में तालाब कोई है तो वह है भोपाल का तालाब"। भोपाल की यह विशालकाय जल संरचना अंग्रेज़ी में 'अपर लेक' कहलाती है। इसी को हिन्दी में 'बड़ा तालाब' कहा जाता है। इसे एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील भी माना जाता है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पश्चिमी हिस्से में स्थित यह तालाब भोपाल के निवासियों के पीने के पानी का सबसे मुख्य स्रोत है।

 

 वन विहारराष्ट्रीय उद्यान

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बड़े तालाब के निकट पहाड़ी पर स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान 445.21 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है। चिड़ियाघर प्रबंधन की आधुनिक अवधारणा के साथ शाकाहारी और मांसाहारी जीवों का 'वन विहार राष्ट्रीय उद्यान' प्राकृतिक निवास स्थान रहा है।

·         इस उद्यान में पाये जाने वाले मांसाहारी जानवरों में बाघ, सफ़ेद बाघतेंदुआ, लकड़बग्घा और सुस्त भालू शामिल हैं।

·         उद्यान के जंगली जानवरों को बड़े बाड़ों में कैद कर पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है।

·         'वन विहार राष्ट्रीय उद्यान' में चीतल, सांभर, काले हिरण, नीले बैल, चौसिंघालंगूर, रेसस बंदर, साही, खरगोश जैसे जानवर आजादी से घूमते हुए देखे जा सकते हैं।

·         भोपाल स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान में घड़ियालमगरमच्छकछुए और साँप की प्रजातियाँ भी पायी जाती हैं।

·         सर्दियों के दौरान दक्षिण-पश्चिम सीमा पर ऊपरी घाटी में प्रवासी पक्षियों की कई किस्में दिखाई देती हैं। पक्षियों की लगभग दो सौ प्रजातियों को यहाँ उद्यान में देखा गया है। अक्सर देखे गए प्रवासी पक्षियों में पिनटेल, स्पॉट बिल, नंगे सिर वाले कलहंस, स्पुन बिल, चित्रित सारस, खुले चोंच वाला सारस और बैंगनी बगुला शामिल है।

 

 

 

भारत भवन केंद्र

भारत भवनभारत के प्रान्त मध्य प्रदेश में स्थित एक विविध कला,सांस्कृतिक केंद्र एवं संग्रहालय है। इसमें कला दीर्घा (आर्ट्स गैलरी), ललित कला संग्रह, इनडोर/आउटडोर ओडिटोरियम, रिहर्सल रूम, भारतीय कविताओं का पुस्तकालय आदि कई चीजें शामिल हैं। यह भोपाल के बड़े तालाब के निकट स्थित है। इस भवन के सूत्रधार चार्ल्स कोरिया[1] का कहना है -

"यह कला केन्द्र एक बहुत ही सुंदर स्थान पर स्थित है, पानी पर झुका हुआ एक पठार जहाँ से तालाब और ऐतिहासिक शहर दिखाई देता है।"

भोपाल स्थित यह भवन भारत के सबसे अनूठे राष्‍ट्रीय संस्‍थानों में एक है। 1982 में स्‍थापित इस भवन में अनेक रचनात्‍मक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है। श्यामला पहाड़ियों पर स्थित इस भवन को प्रसिद्ध वास्‍तुकार चार्ल्‍स कोरिया ने डिजाइन किया था। भारत के विभिन्‍न पारंपरिक शास्‍त्रीय कलाओं के संरक्षण का यह प्रमुख केन्‍द्र है। इस भवन में एक म्‍युजियम ऑफ आर्ट, एक आर्ट गैलरी, ललित कलाओं की कार्यशाला, भारतीय काव्‍य की पुस्‍तकालय आदि शामिल हैं। इन्‍हें अनेक नामों जैसे रूपांकर, रंगमंडल, वगर्थ और अनहद जैसे नामों से जाना जाता है। सोमवार के अतिरिक्‍त प्रतिदिन दिन में 2 बजे से रात 8 बजे तक यह भवन खुला रहता है।