Raj Bhasha

राजभाषा

          राजकाज की भाषा को राजभाषा कहा जाता है | भारत के संविधान में धारा 343 के अनुच्छेद  ३ १/४ ३१/२  के अंतर्गत हिन्दी को राजभाषा का दर्जा १४ सितंबर ११४९ को दिया गया था | इसकी लिपि देवनागरी स्वीकार की गई है | फहले कहा गया था कि केन्द्रीय सरकार के सभी कार्यालयो में ११६५ तक पूरा काम काज हिन्दी में करना शुरू कर दिया जाएगा किन्तु  एसा नहीं हो सका | हिन्दी के साथ अंगेजी को भी मान्यता प्रदान कर दी गई है | इस प्रकार राज काज को दुभाषी रूप में करना आवश्यक हो गया है | केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 3भोपाल को भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर लिया गया है | यहा के अस्सी प्रतिशत (80%) से अधिक कर्मचरियों को हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त |

         

          विद्यालय में राजभाषा कार्यान्वयन समिति का गठन सत्र 2016-17 हेतु दिनांक 01-04-2016 को किया गया. समिति की अध्यक्ष प्राचार्या डॉ. ऋतु पल्लवी के मार्गनिर्देशन में कार्यक्रम के विस्तृत रूपरेखा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुशार निश्चित की गयी।

१. धारा ३(३) की समय समय पर समीक्षा करना ओर क्रियान्वयन में दिशानिर्देशों का अनुपालन करना|

2. धारा १०(4) तथा धारा १०(५) पर विचार किया गया तथा विस्तार से रूपरेखा तय की गयी |

३. हिंदी भाषा के प्रचार एवं प्रसार की अवधारणा पर गहन चर्चा की गयी तथा योजना का निर्माण किया गया.

4. हिंदी भाषा के लेखनवाचन और श्रवण पर विचार रखे गए तथा सुझावों पर अमल हेतु योजना निर्धारित की गयी.

राजभाषा कार्यान्वयन समिति (प्रथम पाली )

अध्यक्ष- (प्राचार्य)

सचिव- श्रीमती अंबिका, टीजीटी (हिन्दी)

सदस्य

1. श्रीमती जेस्मिन कादिर पीजीटी ( रसायन शास्त्र )

2. सुश्री सनु राजप्पन पीजीटी (अर्थशास्त्र)

3. श्री डी के श्रीवास्तव पीजीटी (भौतिक शास्त्र )

4. श्री अरुण प्रताप सिंह कुशवाह पीजीटी (संगणक विज्ञान)

5. श्रीमती मीना पुरोहित,टीजीटी (संस्कृत)

6. श्रीमति सुनीता सिन्हाटीजीटी (अंग्रेजी)

7. श्रीमती मीना नीखरा ,पी आर टी

8. श्रीमती साधना चतुर्वेदी,पी आर टी

9. श्री बी एल शर्मा ,अवर श्रेणी लिपिक